
Maa Kamakhya Temple: त्रेतायुग से जुड़ी है मां कामाख्या मंदिर की मान्यता, नवरात्र में उमड़ते हैं हजारों श्रद्धालु
तारुन अयोध्या। विकास खंड तारुन के ग्राम सभा फतेहपुर कमासिन के मजरे कमासिन में तारुन नन्सा मार्ग से दो किलोमीटर दक्षिण सिद्धपीठ माँ कामांख्या भवानी मंदिर है,जिसका इतिहास बहुत ही पुराना है। मंदिर के पुजारी सत्यदेव मिश्रा उम्र 65 वर्ष व उनके बड़े भाई पुजारी गिरदावल मिश्रा ने बताया कि यहाँ पर पहले घना जंगल था। मानवता के कल्याण के लिये मां कामाख्या त्रेतायुग में यहां प्रकट हुई थी, क्षेत्रवासियों को उनके प्रगट होने की जानकारी उस समय हुई जब सोने की मूर्ति को चुराने के लिए चोर खुदाई करने लगे तो माता की मूर्ति अंदर जमीन में अंतरधान हो गईं।चोर उस समय जिस स्थित में थे वैसे ही स्टेचू बन गये।
उन दिनों जंगल में बंजारों का एक समूह आया हुआ था जो अपने साथ गायो को रखे हुए था ।जंगल मे गायों को चराते हुए जब बीच जंगल मे पहुचे तो देखा कि कुछ लोग फावड़ा लिये निर्जीवों की भांति खड़े हुए है।उसी समय बंजारों की गाये भी बीमार पड़ गई उसके बाद बंजारों ने देवी की स्तुति की । मां कामाख्या की कृपा से सभी बीमार गाये ठीक हो गई उसके बाद बंजारों ने यहां माता की मिट्टी की पिंडी रूप में मूर्ति की स्थापना की ।
स्थानीय निवासी हौसिला प्रसाद पाठक जो गरीबी में जीवन यापन करते थे, वह माँ का आशीर्वाद लेकर कानपुर गए और छोटा सा व्यवसाय शुरू किया,जो धीरे धीरे बड़े व्यवसाय में बदल गया। मन्नत पूरी होने पर पाठक जी घर आये और वर्ष 2001 में भव्य मंदिर बनवाकर उसमें माँ दुर्गा ,लक्ष्मी , सरस्वती के अलावा माँ कामांख्या की मूर्ति स्थापित करवाया। वर्ष में दो बार नवरात्र में नौ दिन भक्तो की भीड़ व दुकानदारों से मंदिर परिसर में चहल पहल रहती है। अष्टमी और नवमी को भक्तगण हजारों की संख्या में आते हैं और अपने कल्याण के लिये पूजा अर्चना करते हैं।
अनिल गिरी ग्राम प्रशासक फतेहपुर कमासिन ने कहा कि मां कामाख्या मंदिर बहुत प्राचीन है। क्षेत्र के लोगों के सहयोग से वर्ष भर कई कार्यक्रम संपन्न होता है। राजनीतिक लोगों ने विकास के नाम पर कोई कार्य नहीं किया।
गांव निवासी अमित वर्मा ने बताया कि माता जी की पिंडी जमीन से निकली है पहले कच्चा खपरैला का मकान था या सैकड़ो बस पुराना मंदिर है।
स्वामी प्रसाद मिश्र कोटेदार ने बताया कि मंदिर के प्रति सांसद विधायकों का ध्यान नहीं गया अब तक पर्यटक स्थल घोषित हो जाना चाहिए था ।
प्रकाश सिंह यादवपुर ने बताया कि मां कामाख्या मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है नवरात्र में नव दिन दर्शनार्थियों की भीड़ रहती है।
राकेश दूवे सोनौरा गाउपुर ने बताया कि कई सरकारें आई और गई सभी ने मंदिर के प्रति उदासीनता दिखाई लेकिन हम लोग प्रयास करेंगे कि मंदिर पर्यटक स्थल घोषित हो जाए।

